भारत सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय सहकार नीति 2025–2045 (National Cooperative Policy) को लेकर बड़ा कदम उठाया है। ये नीति अगले 20 सालों के लिए सहकारिता क्षेत्र की दिशा और दशा तय करेगी। अगर आप किसान हैं, छोटे व्यापारी हैं, महिला स्व-सहायता समूह से जुड़े हैं, या गांव में रहते हैं, तो ये पॉलिसी सीधे तौर पर आपके जीवन को प्रभावित कर सकती है।
इस लेख में हम बात करेंगे कि ये नई सहकार नीति क्या है, इसका उद्देश्य क्या है, किन क्षेत्रों पर फोकस किया गया है, और आम लोगों को इससे क्या–क्या फायदा होगा।
राष्ट्रीय सहकार नीति 2025–2045 क्या है?
राष्ट्रीय सहकार नीति 2025–2045 एक दीर्घकालिक योजना है, जिसका मकसद भारत के सहकारी क्षेत्र (Cooperative Sector) को मज़बूत, पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत बनाना है। यह नीति मौजूदा सहकारी संस्थाओं को सशक्त करने के साथ-साथ नए cooperative models को बढ़ावा देगी।
सरकार का कहना है कि यह नीति किसानों, ग्रामीण उद्यमियों, महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी। साथ ही, ये पॉलिसी Make in India, Digital India और आत्मनिर्भर भारत जैसे मिशनों के साथ भी मेल खाती है।
मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
राष्ट्रीय सहकार नीति 2025–2045 के पीछे कई बड़े और साफ़ उद्देश्य हैं:
- Cooperative governance में सुधार
पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर नेतृत्व को बढ़ावा देना। - Technology का समावेश
सहकारी संस्थाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना, जिससे लेन-देन और डेटा मैनेजमेंट आसान हो। - Youth और Women participation बढ़ाना
युवाओं और महिलाओं की सहकारी गतिविधियों में हिस्सेदारी बढ़ाना, उन्हें entrepreneurship के लिए प्रेरित करना। - Multi-State Cooperative Societies को प्रमोट करना
राज्यों की सीमाओं से बाहर काम करने वाली सहकारी संस्थाओं को कानूनी और वित्तीय सहायता देना। - Credit Access को आसान बनाना
किसानों और छोटे उद्यमियों को कम ब्याज पर लोन दिलाने के लिए सहकारी बैंकों की भूमिका को मज़बूत बनाना।
किन–किन क्षेत्रों पर फोकस होगा?
इस नीति में केवल कृषि ही नहीं, बल्कि गैर-कृषि क्षेत्रों को भी काफी तवज्जो दी गई है:
- Agri-marketing और storage
- Fisheries, Dairy, Poultry
- Handicrafts और rural manufacturing
- Consumer cooperatives (उपभोक्ता सहकारी संस्थाएं)
- Housing और Construction cooperatives
- Healthcare और education services
यह नीति केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि value chain के हर स्टेप को कवर करती है – यानी उत्पादन, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और आखिर में उपभोग।
आम आदमी को इससे क्या फायदा होगा?
अब बात करते हैं असली मुद्दे की – National Cooperative Policy से सीधे तौर पर आम जनता को क्या मिलेगा:
1. रोज़गार के नए अवसर
गांवों में cooperative आधारित छोटे उद्योग खुलने से local level पर रोजगार मिलेगा।
2. उत्पाद का बेहतर दाम
किसानों को मंडी के दलालों से छुटकारा मिलेगा और वो सीधे सहकारी संस्थाओं के ज़रिए अपना माल बेच सकेंगे।
3. आसान और सस्ता Loan
Self-help groups और किसान cooperative societies के ज़रिए बैंकों से आसानी से और कम ब्याज पर लोन मिलेगा।
4. Digital सुविधा और transparency
हर transaction, subsidy और scheme की जानकारी एक क्लिक में मिलने लगेगी, जिससे भ्रष्टाचार कम होगा।
5. महिलाओं को विशेष प्रोत्साहन
नीति में महिलाओं के लिए अलग से quotas और incentive schemes का प्रावधान होगा, जिससे वो self-reliant बन सकें।
सरकार की क्या तैयारी है?
सरकार ने इस नीति को लागू करने के लिए Ministry of Cooperation के ज़रिए एक national task force गठित किया है। इसके अलावा नीति के हर चरण की निगरानी के लिए performance tracking system बनाया जाएगा।
Digital cooperative portal भी बनाया जा रहा है, जिसमें देशभर की सभी cooperative societies की जानकारी centralized होगी।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय सहकार नीति 2025–2045 सिर्फ एक सरकारी दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि ये एक vision document है – जो आने वाले 20 सालों में भारत के गांवों और छोटे शहरों में नया बदलाव ला सकता है। अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह नीति भारत को आत्मनिर्भर बनाने में एक अहम भूमिका निभाएगी।
सरकार की इस पहल का सीधा फायदा उन लोगों तक पहुंचेगा, जो अभी भी आर्थिक और सामाजिक रूप से हाशिए पर हैं। ये एक ऐसा मौका है जिसे अगर समाज ने सही से अपनाया, तो सहकारिता एक बार फिर भारत की आत्मा बन सकती है।
अगर आप भी किसी सहकारी संस्था से जुड़े हैं, या जुड़ना चाहते हैं, तो आने वाले समय में इस नीति की गाइडलाइंस और updates पर नज़र बनाए रखें। सही जानकारी और भागीदारी से ही इस नीति का असली लाभ लिया जा सकता है।