SOAR योजना क्या है और कैसे मिलेगा Skilling for AI Readiness का फायदा?

देश में तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर को देखते हुए भारत सरकार ने एक नई और बेहद जरूरी पहल की है — SOAR योजना, यानी Skilling for AI Readiness। अगर आप या आपके बच्चे टेक्नोलॉजी में करियर बनाना चाहते हैं, तो यह योजना आपके लिए एक सुनहरा मौका है। इसमें छात्रों को Artificial Intelligence जैसे फ्यूचर-रेडी स्किल्स में ट्रेनिंग दी जाएगी, वो भी सरकारी स्तर पर और बिल्कुल मुफ्त।

चलिए, सीधे मुद्दे पर आते हैं और जानते हैं कि SOAR योजना क्या है, इसमें कौन-कौन जुड़ सकता है, इसमें क्या सिखाया जाएगा, और इसके क्या-क्या फायदे हैं।


SOAR योजना क्या है?

SOAR योजना (Skilling for AI Readiness) को नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु ने मिलकर शुरू किया है। इसका मकसद ट्राइबल स्टूडेंट्स यानी आदिवासी बच्चों को AI और Machine Learning जैसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी स्किल्स में तैयार करना है, ताकि वे आने वाले समय में इस फील्ड में पीछे न रह जाएं।


योजना का उद्देश्य क्या है?

SOAR योजना का सीधा लक्ष्य है:

  • छात्रों को 21वीं सदी के लिए तैयार करना
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस जैसे स्किल्स सिखाना
  • भारत के दूर-दराज और आदिवासी इलाकों के बच्चों को टेक्नोलॉजी से जोड़ना

कौन-कौन जुड़ सकता है इस योजना से?

SOAR योजना खासतौर पर एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों (EMRS) के छात्रों के लिए लाई गई है। शुरुआत में इसे भुवनेश्वर, विशाखापत्तनम, हैदराबाद और बैंगलोर के कुछ EMRS स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है। इसके बाद इसे देशभर में विस्तार दिया जाएगा।

फिलहाल, इसमें 9वीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राएं भाग ले सकते हैं, जो ट्राइबल स्कूलों में पढ़ रहे हैं।


क्या-क्या सिखाया जाएगा?

SOAR योजना में छात्रों को नीचे दिए गए टेक्निकल और soft skills सिखाई जाएंगी:

  • Introduction to AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है, कैसे काम करता है
  • Machine Learning Basics
  • Python Programming
  • Data Analysis & Visualization
  • Problem Solving और Logical Thinking
  • Ethics in AI – AI से जुड़े नैतिक मुद्दों की समझ
  • Real-life AI Applications – जैसे स्मार्ट हेल्थ, एग्रीकल्चर, एजुकेशन आदि में AI का उपयोग

इन सभी चीजों को प्रैक्टिकल तरीके से, यानी hands-on projects और assignments के ज़रिए सिखाया जाएगा।


छात्रों को कैसे मिलेगा फायदा?

  1. Early Exposure: छात्र कम उम्र में ही AI जैसे एडवांस्ड विषयों से परिचित हो जाएंगे।
  2. Career Opportunities: आगे चलकर IT, Data Science, Robotics, और AI sectors में करियर के बेहतर रास्ते खुलेंगे।
  3. Competitive Edge: आज के समय में जिस छात्र को टेक्नोलॉजी की समझ है, वो बाकी लोगों से कहीं आगे है।
  4. Government Support: ये पूरी ट्रेनिंग सरकारी खर्च पर होगी यानी छात्रों को कोई फीस नहीं देनी होगी।
  5. Mentorship और Guidance: IISc जैसे संस्थान के एक्सपर्ट्स से सीधे मार्गदर्शन मिलेगा।

योजना कब से शुरू हुई?

SOAR योजना 2024 के आखिरी क्वार्टर में शुरू की गई है। फिलहाल ये एक पायलट प्रोजेक्ट है, लेकिन आने वाले महीनों में इसे और भी राज्यों में लागू किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस स्कीम के जरिए लाखों ट्राइबल स्टूडेंट्स को नई टेक्नोलॉजी में दक्ष बनाया जाए।


योजना के पीछे सोच क्या है?

आज पूरी दुनिया में AI की मांग तेजी से बढ़ रही है। इंडिया में भी हर सेक्टर में AI का उपयोग हो रहा है — चाहे वो education हो, healthcare, agriculture या security। लेकिन इस तेज़ी से बढ़ती तकनीकी क्रांति में हमारे समाज के कुछ हिस्से पीछे छूट रहे हैं, खासकर ट्राइबल कम्युनिटी।

SOAR योजना के जरिए सरकार कोशिश कर रही है कि inclusive growth हो — यानी हर बच्चा, चाहे वो किसी भी इलाके से हो, इस टेक्नोलॉजी की दौड़ में शामिल हो सके।


आगे क्या उम्मीद की जा सकती है?

सरकार इस योजना को सफल बनाकर आने वाले समय में इसे सभी सरकारी स्कूलों और जिलों में लागू कर सकती है। साथ ही, इसमें AI-based internships, advanced level certifications, और startup incubation जैसे फीचर्स भी जोड़े जा सकते हैं।


निष्कर्ष

SOAR योजना (Skilling for AI Readiness) सिर्फ एक स्कीम नहीं, बल्कि एक मौका है। ये मौका है आदिवासी बच्चों को बराबरी से आगे बढ़ने का, और आने वाले AI-ड्रिवन भविष्य में अपनी एक मजबूत जगह बनाने का।

अगर आपके परिवार में कोई बच्चा EMRS स्कूल में पढ़ता है, तो इस योजना के बारे में जरूर जानकारी लें और उसे हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करें। ऐसे मौके बार-बार नहीं आते।

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